Inside Story: सरहद पार रची गई मोहाली धमाके की साजिश, हमले में ISI का हाथ!

 मोहाली के जिस दफ़्तर पर रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड यानी आरपीजी से हमला किया गया है, वो सबके बस की बात नहीं है. ऐसे में हमले के तार सरहद पार से जुड़ते दिखाई देते हैं. यह हमला अपने आप में कई सवाल खड़े कर गया है.



क्या पंजाब में इंटेलिजेंस हेडक्वार्टर पर हुआ आरपीजी अटैक आईएसआई और ख़ालिस्तान समर्थित आतंकियों की साज़िश है? पंजाब पुलिस ने बेशक अभी इस हमले की पूरी साज़िश का ख़ुलासा ना किया हो, लेकिन खुफ़िया सूत्रों को इस हमले को लेकर कुछ ऐसी ही आशंका है. असल में मोहाली के इस दफ़्तर पर जिस तरह से रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड यानी आरपीजी से हमला किया गया है, वो सबके बस की बात नहीं है. ऐसे में हमले के तार सरहद पार से जुड़ते दिखाई देते हैं.

मोहाली में पंजाब इंटेलिजेंस दफ्तर में रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड यानी आरपीजी का हमला अपने आप में कई सवाल खड़े कर गया है. सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि आख़िर इस आरपीजी अटैक का सच क्या है? क्या ये आईएसआईए के इशारे पर किया गया ख़ालिस्तानी आतंकियों का हमला है या फिर कुछ और? क्योंकि जिस तरह हमले में रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड यानी आरपीजी का इस्तेमाल किया गया, वैसा हमला करना हर किसी के बस की बात नहीं है. ऐसे हथियारों का इस्तेमाल आम तौर पर फ़ौज या अर्धसैनिक बलों के जवान ही करते हैं, ऐसे में अगर पंजाब इंटेलिजेंस के दफ़्तर पर रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड यानी आरपीजी से हमला होता है, तो मामला यकीन गंभीर हो जाता है.


उधर, खुफ़िया सूत्रों का कहना है कि आईएसआईए पंजाब को फिर से आतंक की आग में झोंकने की साज़िश रच रहा है. इसके लिए उसने अपने हेडक्वार्टर में कश्मीर और खालिस्तान के लिए एक ज्वाइंट डेस्क बना दिया है, इस 'के-टू' डेस्क के पास कश्मीर के साथ-साथ पंजाब को भी अशांत करने की सुपारी है. और तो और आईएसआई ने इसके लिए एक नए आतंकी संगठन की भी शुरुआत की है, जिसे नाम दिया है 'लश्कर-ए-खालसा.' फिलहाल मोहाली में हुए अटैक की पूरी तस्वीर बेशक अभी साफ़ नहीं हुई हो, लेकिन ये हमला आईएसआई की साज़िश की तरफ़ इशारा ज़रूर करता है. वैसे भी आरपीजी पड़ोस के किसी दुकान से ख़रीद कर लाया नहीं जा सकता और इसे चलाने के लिए भी ट्रेनिंग की दरकार होती है.धमाके को देख कर इतना तो साफ़ है कि हमलावरों का इरादा फिलहाल किसी की जान लेने का नहीं था. वरना वो एक खाली पड़ी इमारत को शाम के वक़्त टार्गेट नहीं करते. लेकिन इतना तो साफ है कि वो पूरे के पूरे तंत्र को एक मैसेज ज़रूर देना चाहते थे.


इस धमाके का ये तरीक़ा और इसमें इस्तेमाल हुआ हथियार ही ये बताने के लिए काफ़ी है कि ये हमला मामूली नहीं है. आतंकी आम तौर पर पुलिस, सेना और सुरक्षा ठिकानों को अपना निशाना बनाते हैं. और इस मामले में भी कुछ ऐसा ही है. हाल के दिनों में पंजाब में ख़ालिस्तानी गतिविधियां भी काफ़ी तेज़ हुई हैं. कई गिरफ़्तारियां और विस्फोटकों की बरामदगी इसका सबूत है. पहले 24 अप्रैल को चंडीगढ़ से विस्फटोक बरामद हुआ और फिर हमले से महज़ एक रोज़ पहले तरनतारन से भी कुछ संदिग्ध पकड़े गए.


तो क्या ये महज़ इत्तेफ़ाक है? शायद नहीं. और फिलहाल पंजाब पुलिस लेकर देश की तमाम सुरक्षा एजेंसियों को इसी शायद का सच ढूंढ निकालना है. इस वारदात और इससे पहले हुई वारदातों के सिलसिले पर ग़ौर करें, तो ये साफ हो जाता है कि ये मामला सीधा नहीं है. इससे पहले हाल के दिनों में सामने आई आतंकी गतिविधियों पर एक निगाह डालते हैं-


- सबसे ताज़ा मामला तो 9 मई का ही है, जब मोहाली में ख़ुफ़िया विभाग के हेडक्वाटर पर हमला हुआ. 9 मई को ही अमृतसर से हेरोइन की भारी खेप बरामद हुई. शक है कि इसका इस्तेमाल नार्को टेररिज़्म के लिए किया जानेवाला था.


- इससे महज़ एक रोज़ पहले 8 मई को तरनतारन में आतंकी साज़िश नाकाम हुई. वहां से पुलिस ने आरडीएक्स जैसी ख़ौफ़नाक चीज़ बरामद की.


- इससे पहले 5 मई को हरियाणा के करनाल से चार आतंकी हथियारों के साथ धर दबोचे गए.


ये कार्रवाई, ये गिरफ्तारियां और ये कोशिशें पंजाब में लगातार बढ़ते आतंकी साज़िश की तरफ़ इशारा करते हैं. सूत्रों का कहना है कि बब्बर खालसा का चीफ़ वधावा सिंह, खालिस्तान ज़िंदाबाद फ़ोर्स का चीफ़ रंजीत सिंह नीटा, इंडियन सिख यूथ फेडरेशन का चीफ़ भाई लखबीर सिंह रोडे और खालिस्तान कमांडो फ़ोर्स का परमजीत सिंह पंजवड़ सरीखे लोग खुलेआम पाकिस्तान और वहां की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के हाथों में खेल रहे हैं. इनमें से कई पाकिस्तान में ही छुपे बैठे हैं और वहां से भारत को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं.


हाल ही के दिनों में ड्रोन के ज़रिए सरहद पार से भारत में और ख़ास कर पंजाब में हथियार पहुंचाए जाने की एक नई मोडस ऑपरेंडी भी सामने आई है. ख़ुफ़िया

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